Advertisement
देखें प्रेमानंद महाराज ने क्या-क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, “काम भोग जो सृष्टि में रखा गया है, ये सृष्टि क्रम को बढ़ाने के लिए है. स्त्री और पुरुष का जो सहयोग विधान शास्त्र है, वो वो संतान उत्पत्ति के लिए है, न कि मनोरंजन के लिए. तभी शरीर सेहतमंद रहता है. मुझे लगता है कि अगर आप थोड़ा विचारवाहन बन जाएं और आध्यात्म की शरण लेकर इसके शासन में लें, तो आप बहुत अच्छे बन सकते हैं.”
