मन की बात: कई राज्यों में गैर-पारंपरिक फसलों के उत्पादन में मिली सफलता, पीएम ने साझा की सफल किसानों की कहानी – Mann Ki Baat: Expanding Traditional Crops To Non-traditional Areas, Pm Modi Shares Stories Of Successful Farme

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मन की बात कार्यक्रम को संबोधित करते पीएम मोदी।

मन की बात कार्यक्रम को संबोधित करते पीएम मोदी।
– फोटो : सोशल मीडिया

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम का 121वां एपिसोड संबोधित किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने कर्नाटक के किसान का जिक्र किया है, जिन्होंने कर्नाटक जैसे मैदानी राज्य में सेब उत्पादन कर दिखाया है। वहीं, पीएम ने अपने संबोधन में बताया कि अब हिमाचल के किन्नौर और केरल के वायनाड में केसर उत्पादन में सफलता मिली है। 

पहाड़ों के साथ मैदानी इलाकों में भी सेब की बागवानी 

पीएम मोदी ने कर्नाटक के सेब उत्पादन किसान का जिक्र करते हुए कहा कि दोस्तों, एक पुरानी कहावत है जहां चाह होती है, वहां राह होती है। जब हम कुछ नया करने की ठान लेते हैं, तो मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। पहाड़ों में उगने वाले सेब तो आपने खूब खाए होंगे। लेकिन, अगर मैं आपसे पूछूं कि क्या आपने कर्नाटक के सेब चखे हैं, तो आप हैरान हो जाएंगे। आमतौर पर हम सोचते हैं कि सेब केवल पहाड़ों में ही उगते हैं। लेकिन कर्नाटक के बागलकोट में रहने वाले शैल तेली जी ने मैदानी इलाकों में सेब उगाए हैं। उनके कुलाली गांव में सेब के पेड़ 35 डिग्री से अधिक तापमान में भी फल देने लगे हैं। 

खेती के शौक से अच्छी कमाई 

पीएम मोदी ने बताया कि शैल तेली को खेती का शौक था। इसलिए उन्होंने सेब की खेती भी की और इसमें उन्हें सफलता भी मिली। आज उनके लगाए पेड़ों पर खूब सेब उगते हैं और उन्हें बेचकर वो अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सेब के लिए मशहूर किन्नौर में केसर उत्पादन शुरू 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में शुरू हुए केसर उत्पादन को भी जगह दी है। पीएम ने कहा कि अब जब सेब की बात चल ही रही है, तो आपने किन्नौरी सेब का नाम तो सुना ही होगा। सेब के लिए मशहूर किन्नौर में केसर की पैदावार शुरू हो गई है। हिमाचल में आमतौर पर केसर की खेती बहुत कम होती थी, लेकिन अब किन्नौर की खूबसूरत सांगला घाटी में इसकी खेती शुरू हो गई है। 

केरल के वायनाड में तकनीक से केसर उत्पादन 

पीएम मोदी ने बताया कि केरल के वायनाड में भी केसर उगाने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि वायनाड में यह केसर किसी खेत या मिट्टी में नहीं, बल्कि एरोपोनिक्स तकनीक की मदद से उगाया जा रहा है। 

लीची उत्पादन को मिली विस्तार 

पीएम ने बताया कि लीची उत्पादन के साथ भी कुछ ऐसा ही आश्चर्यजनक हुआ है। हम सुनते आए थे कि लीची बिहार, पश्चिम बंगाल या झारखंड में उगती है। लेकिन अब दक्षिण भारत और राजस्थान में भी लीची उगाई जा रही है। तमिलनाडु के थिरु वीरा अरासु पहले कॉफी की खेती करते थे। उन्होंने कोडईकनाल में लीची के पेड़ लगाए और 7 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन पेड़ों पर फल लगने लगे हैं। लीची उगाने में मिली सफलता ने क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया है। 

राजस्थान में लीची उत्पादन सफल 

पीएम ने बताया क़ी राजस्थान में जितेंद्र सिंह राणावत ने लीची उगाने में सफलता पाई है। ये सभी उदाहरण बहुत प्रेरणादायक हैं। अगर हम कुछ नया करने की ठान लें और मुश्किलों के बावजूद लगे रहें, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

 



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