LK Advani Special Advani Arrest Became Biggest Turning Point In Bihar Lalu Yadav Emerged As Muslim Messiah

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LK Advani Birthday Special: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच आज (शनिवार, 08 नवंबर) बीजेपी के लिए बहुत बड़ा दिन है. पार्टी के संस्थापक सदस्य और देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल कृष्ण आडवाणी का आज जन्मदिन है. आडवाणी आज अपना 98वां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रहे हैं. बिहार की सियासत में लालकृष्ण आडवाणी का बड़ा अहम किरदार है. आडवाणी की रथयात्रा का भाजपाई बड़े गर्व से जिक्र करते हैं तो दूसरी ओर लालू यादव के लिए वे लकी चार्म साबित हुए. राम मंदिर आंदोलन के दौरान लालू यादव ने समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार कराकर मुसलमानों का दिल लूट लिया. आडवाणी को गिरफ्तारी के बाद बिहार के मुसलमान राजद के कोर वोटर बन गए. मुसलमानों को अपने पाले में करने के लिए लालू यादव ने केंद्र की अपनी वीपी सिंह की सरकार को भी कुर्बान कर दिया था. उन्हें अच्छी तरह से पता था कि आडवाणी की गिरफ्तारी से वीपी सिंह की सरकार चल नहीं पाएगी, इसके बावजूद उन्होंने यह साहस दिखाया. इस घटना ने प्रदेश की सियासत में नई इबारत लिखने का काम किया. 

सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा निकालकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, साथ ही देश की राजनीति की धारा को मोड़कर रख दिया. जिस तरह से बीजेपी और नीतीश कुमार हर चुनाव में लालू यादव के जंगलराज का भय दिखाते हैं, उसी तरह से राजद भी मुसलमानों को भाजपा के नाम से डराकर उनका वोट हासिल कर लेती है. कहा जाता है कि लालू यादव ने आडवाणी को रथ यात्रा निकालने से मना किया था, लेकिन आडवाणी नहीं माने. जिसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को गिरफ्तारी की चुनौती तक दे डाली थी. 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से आडवाणी ने रथयात्रा की शुरुआत की. यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, उसके साथ लोगों का काफिला जुड़ता जा रहा था. 

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इससे सेक्युलर छवि वाले नेता भयभीत थे. लालू यादव और दिवंगत मुलायम सिंह यादव के बीच भी खुद को एक-दूसरे से बड़ा सेक्युलर साबित करने की होड़ थी. लालू की चुनौती को दरकिनार करते हुए यात्रा बिहार पहुंच चुकी थी. 23 अक्टूबर 1990 की रात को यात्रा को समस्तीपुर में विश्राम दिया गया. सर्किट हाउस में आडवाणी के ठहरने की व्यवस्था की गई थी. रात 12 बजे के करीब कमरा नंबर-7 में आडवाणी विश्राम करने के लिए चले गए और समर्थक भी अपने-अपने घर चले गए. रात डेढ़ बजे के करीब वहां एक अनजान नंबर से फोन आया और आडवाणी जी के वहां होने की जानकारी ली गई. कुछ देर बाद ही समस्तीपुर के तत्कालीन डीएम आरके सिंह (मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके) पूरे लाव-लश्कर के साथ वहां पहुंचे और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें रातों-रात बिहार-बंगाल के सीमावर्ती जिले दुमका के मासनजोर डाक बंगले में शिफ्ट कर दिया गया. लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी. सुबह जब लोग आडवाणी से मिलने पहुंचे तो उनकी गिरफ्तारी की जानकारी पता चली. सर्किट हाउस में फोन करके आडवाणी की जानकारी लेने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि लालू यादव खुद थे. उन्होंने खुद इसका खुलासा किया था. इस घटना के बाद से लालू यादव बिहार के मुसलमानों के लिए मसीहा बन गए. 

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