Bikram Singh Majithia Raid,बिक्रम मजीठिया के घर पंजाब विजिलेंस का छापा, हिरासत में लिए गए, बुरा फंसे अकाली दल नेता – punjab vigilance raids residence of akali leader bikram singh majithia in amritsar in a drug case

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चंडीगढ़ : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के अमृतसर स्थित निजी आवास पर छापा मारा। यह छापा एक ड्रग मामले में मारा गया। छापेमारी के बाद उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया। मजीठिया पर विधानसभा चुनावों से पहले, दिसंबर 2021 से ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत आरोप लगे हैं। सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह छापा भगवंत मान सरकार की ड्रग्स के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। विजिलेंस के 30 अधिकारियों की एक टीम, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, मजीठिया के घर पहुंची। उस समय मजीठिया और उनका परिवार घर पर ही मौजूद थे।

2021 से चल रहा मामला

पूर्व विधायक बिक्रम मजीठिया, जो शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बहनोई हैं, ने 2022 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने यह याचिका मोहाली की एक ट्रायल कोर्ट द्वारा NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद दायर की थी। यह मामला 20 दिसंबर, 2021 को दर्ज किया गया था।

बिक्रम मजीठिया पर इन धाराओं में केस

पंजाब पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मोहाली पुलिस स्टेशन में 49 पेज की FIR दर्ज की थी। इसमें SAD नेता मजीठिया पर NDPS एक्ट की धारा 25, 27A और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बिक्रम मजीठिया का क्या दावा

अपनी याचिका में मजीठिया ने इस मामले को ‘राजनीतिक बदले’ का नतीजा बताया था। उन्होंने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कोई विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य सामग्री नहीं है। उनका कहना था कि यह केस उन्हें फंसाने के लिए किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन साथ ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को मजीठिया से पूछताछ करने की अनुमति भी दे दी थी।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने कहा कि SIT उनसे पूछताछ कर सकती है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि मजीठिया के पास से कोई ड्रग्स बरामद हुई हो, या उन्होंने ड्रग्स का परिवहन या भंडारण किया हो। कोर्ट ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
कोर्ट ने कहा कि पहले के मामलों में जो भी ड्रग्स बरामद हुई, वो कुछ खास लोगों से हुई थी। मजीठिया का उसमें कोई रोल नहीं था। कोर्ट जगदीश भोला और अन्य के ड्रग जब्ती मामलों का जिक्र कर रही थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने 26 पेज के फैसले में यह भी साफ किया कि कोर्ट की यह राय सिर्फ उनकी जमानत याचिका पर फैसला करने के लिए है। इसे फाइनल ओपिनियन नहीं माना जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में मामला

मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को पटियाला में SIT के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राज्य सरकार ने बताया था कि मजीठिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। सरकार का कहना था कि मजीठिया सवालों के जवाब नहीं दे रहे हैं। हालांकि, अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा मजीठिया को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि मजीठिया जांच में सहयोग कर रहे हैं। और उन्हें अगस्त 2022 में जमानत दी गई थी, जो कि ढाई साल पहले की बात है। इसलिए कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देना चाहता। कोर्ट ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। कुल मिलाकर, मजीठिया पर ड्रग्स से जुड़े आरोप हैं। फिलहाल उन्हें जमानत मिल गई है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। विजिलेंस ब्यूरो ने उनके घर पर छापा मारा है और SIT उनसे पूछताछ कर रही है। कोर्ट ने भी इस मामले पर अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं दिया है।



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