What Is Short Duration Fund,RBI ने नहीं किया रेपो रेट में बदलाव लेकिन आगे है गुंजाइश, अब शॉर्ट टर्म के लिए कहां लगाएं पैसा? – short duration fund is better option after no change in repo rate says experts

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आरबीआई ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन आगे इसमें रेट कट की गुंजाइश बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि महंगाई और खपत में कमी देखी जा रही है। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल डेट (Debt) इन्वेस्टमेंट के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स बेहतर रहेंगे।

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आरबीआई ने एक बार फिर रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट 5.5% पर ही बरकरार रखा है। ऐसे में मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल डेट (Debt) इन्वेस्टमेंट के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स बेहतर रहेंगे, जबकि लंबे समय के लक्ष्यों के लिए निवेशकों को धीरे-धीरे इक्विटी में अपना हिस्सा बढ़ाना चाहिए। RBI गवर्नर की ओर से रेपो रेट में कोई बदलाव न करने के ऐलान के बाद विशेषज्ञ का कहना है कि इस बार भले ही कोई रेट कट न हुआ हो, लेकिन भविष्य में इसकी गुंजाइश बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि महंगाई और खपत में कमी देखी जा रही है।

प्लानर सर्टिफाइड फाइनैंशल (CFP) राजेश मिनोचा ने ET को बताया कि रेपो रेट 5.5% पर स्थिर है और महंगाई भी आगे कम होने की संभावना है। ऐसे में पूरे निवेश में डेट से जुड़े निवेश के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन फंड ही ठीक रहेंगे। लंबी अवधि के लक्ष्यों के हिसाब से निवेशक इक्विटी के जरिए अपना निवेश बढ़ाना जारी रख सकते हैं। एक्सपर्ट की सलाह है कि जिन निवेशकों के लक्ष्य 4 साल से कम समय के हैं वो अपना पैसा डेट फंड्स में ही रखें। वहीं, जिनके लक्ष्य लंबे समय के हैं, उन्हें इक्विटी में निवेश करना चाहिए।

राजेश मिनोचा का कहना है कि डेट फंड्स में निवेश शॉर्ट ड्यूरेशन और अच्छी क्वॉलिटी वाले फंड्स के जरिए रखना चाहिए। छोटे समय के लक्ष्यों के लिए डेट फंड्स ही ठीक हैं। पर लंबे समय के लिए इक्विटी सही है। इसकी वजह ये है कि यहां शॉर्ट टर्म बोलैटिलिटी होने के बावजूद ग्रोथ और कंपाउंडिंग के मौके ज्यादा बेहतर हैं।
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‘डायनामिक बॉन्ड फंड में मौका’

क्वांटम एएमसी की फंड मैनेजर (फिक्स्ड इनकम) स्नेहा पांडे कहती है कि निवेशकों के लिए मौजूदा माहौल में डायनामिक बॉन्ड फंड एक अच्छा मौका देते है। ये फंड ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव के हिसाब से अपनी अवधि को अडजस्ट कर सकते हैं, जिससे वे आगे होने वाली ब्याज दरों में कटौती का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। जैसे-जैसे दरें गिरती है, लंबी अवधि के बॉन्ड की कीमत आम तौर पर बढ़ती है, जिससे रिटर्न बेहतर होता है। कम समय के लिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए लिक्विड फंड एक अच्छा विकल्प हैं।
MPC रिपोर्ट में बताया गया कि FPI की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार में शुद्ध खरीदार बने रहकर एक संतुलन बनाने वाली ताकत के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय इक्विटी मार्केट को मजबूती दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, म्युचुअल फंड में फ्लो को सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की लगातार और बढ़ती पहुंच से सहारा मिला है। SIP के जरिए म्युचुअल फंड में औसत मासिक योगदान वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही के 25,905 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अगस्त तक) में 27,464 करोड़ रुपये हो गया।

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सही रणनीति अपना सकते हैं निवेशक

भारत की मजबूत GDP ग्रोथ, काबू में महंगाई और पहले की गई ब्याज दरों में कटौती का असर RBI के फैसलों में दिखा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत सरकार के इनकम टैक्स और GST में सुधार जैसे कदम उपभोक्ता के भरोसे को बढ़ाने और आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने में मदद करेंगे। ऐसे में निवेशक बाजार की अस्थिरता के हिसाब से सही रणनीति अपना सकते हैं।

दिल प्रकाश

लेखक के बारे मेंदिल प्रकाशदिल प्रकाश, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर है। वह 20 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने खेल, राजनीति, संसद, रक्षा और बिजनस जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है। दिल प्रकाश पांच साल से भी अधिक समय से एनबीटी डिजिटल के साथ जुड़े हैं। इससे पहले वह यूनीवार्ता और बिजनस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीबीसी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के रूप में काम किया है। दिल प्रकाश ने नई दिल्ली के भारतीय विद्या भवन संस्थान से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।… और पढ़ें